Thursday, July 1, 2010

Imtihaan

ले ज़िन्दगी इम्तिहान तू मेरा,
ये आँखें अब ना रोयेंगी,
तू चाहे लाख बुरा कर ले,
ये मुस्कान अब ना खोयेंगी,
माना मैंने कि मैं तो बस एक मोहरा हूँ,
जिसकी कोई बिसात नहीं,
पर वादा रहा तुझसे ज़िन्दगी,
मेरी साँसे तेरी हर चाल को रोकेंगी,
बहुत उतार-चढाव देखे हैं मैंने,
बहुत बार तुने हसाया और रुलाया है,
और हर बार तुने अपनी अंगुली पर ही मुझे नचाया है,
पर मेरी आत्मा तेरी बात अब ना मानेंगी,
तू चाहे लाख जतन कर ले,
ये पलकें अब ना भिगेंगी,
ले ज़िन्दगी इम्तिहान तू मेरा,
ये आँखें अब ना रोयेंगी...

4 comments:

  1. pyari hai. par itni sad poem mat likha kar kitto...
    We'll rock:)

    ReplyDelete
  2. @ gazal: sad kahn hai, ye to mast hai..yes, we 'll rock..:)

    ReplyDelete
  3. Wow, sir!! Enthralling post!! :)
    Luv it!!

    ReplyDelete
  4. bro.. awesome !!!
    obviously the best one uptil now..

    ReplyDelete