Sunday, June 20, 2010

Ehsaas

दिल से उठी एक आवाज़ थी वो,
मुझ अंधे को रास्ता  दिखाने वाला प्रकाश था वो,
ज़िन्दगी मेरी ठहर सी गयी थी,
ऐसा खुशनुमा एहसास था वो,
पर ये जिंदगी कभी रूकती नहीं,
आप लाख चिल्ल्लाओ, लाख समझाओ,
आपको समझती नहीं,
इसलिए आज मैं आगे बढ़ रहा हूँ,
शायद उस एहसास को खो रहा हूँ,
मैं उसे खोना तो नहीं चाहता,
पर अब तो उसे दुबारा पाने से भी डर रहा हूँ,
शायद मुझे खुद से मिलाने के लिए ही मुझमे जगा था वो,
ज़िन्दगी ज़ीने का सबक सिखाने वाला एहसास था वो,
और आज बीच राह मे मुझे फिर से अकेला छोड़ के,
मुझ पर हसते हुए दूर कहीं जा रहा है वो...

Thursday, June 17, 2010

Meri uljhan

मैं रोना चाहता था, पर आंसू बहे नहीं,
मैं रोकना चाहता था, पर कदम आगे बढे नहीं,
चीजों को समझते-२ मैं इतना ज्यादा समझने लगा कि,
आज जब मैं  लौटना चाहता हूँ, मुझे दिल  की गवाही मिलती नहीं..
वो समय भी प्यारा था, जब मेरा दिल मेरे साथ था,
मुझे खुद  पर पूरा विश्वास था,
पर अब तो इतने मानसिक द्वन्द हैं होते कि,
जीत के भी मैं खुद को जीता हुआ मान पाता नहीं,
वो ना समझ सका मेरी इस उलझन को,
मेरी बातों, मेरी आँखों मे छुपी हुई तड़पन. को,
शायद इसीलिए आज जब मैं  ठहरना चाहता हूँ, तब ये कदम रुकते  नहीं,
मैं आज भी रोना चाहता हूँ, पर कमबख्त ये आंसू बहते नहीं..