Sunday, June 20, 2010

Ehsaas

दिल से उठी एक आवाज़ थी वो,
मुझ अंधे को रास्ता  दिखाने वाला प्रकाश था वो,
ज़िन्दगी मेरी ठहर सी गयी थी,
ऐसा खुशनुमा एहसास था वो,
पर ये जिंदगी कभी रूकती नहीं,
आप लाख चिल्ल्लाओ, लाख समझाओ,
आपको समझती नहीं,
इसलिए आज मैं आगे बढ़ रहा हूँ,
शायद उस एहसास को खो रहा हूँ,
मैं उसे खोना तो नहीं चाहता,
पर अब तो उसे दुबारा पाने से भी डर रहा हूँ,
शायद मुझे खुद से मिलाने के लिए ही मुझमे जगा था वो,
ज़िन्दगी ज़ीने का सबक सिखाने वाला एहसास था वो,
और आज बीच राह मे मुझे फिर से अकेला छोड़ के,
मुझ पर हसते हुए दूर कहीं जा रहा है वो...

1 comment:

  1. awesome!!!
    luks lik writer ankit is turnin to poet ankit....!!!
    coooooooooooolllll..

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