Tuesday, June 25, 2013

Main

कुछ छुपा  सा है, कुछ दबा सा है ,
लाख कोशिशो के बाद भी मुझे कभी नहीं मिलता है वो,
और उसके बिना जीते हुए हर पल मुझे ये लगे कि
कुछ जुदा सा है, कुछ खफा सा है।
 
दूरियां कुछ इस कदर बढ़ी हैं उससे कि ,
साथ बिताये लम्हों की बात भी अब बेईमानी लगाती है ,
 जानता हूँ कि एक दिन हार जाऊँगा उसकी दोस्ती की ताक़त  के आगे  ,
पर उससे मिलने के ख्याल से ही ये दिल कुछ डरा सा है 

मैंने तो क़सम खायी थी उससे अलग चलने की,
उससे दूर कहीं और दुनिया मे कुछ नया करने की,
रास्ते तो सारे चल लिए मैंने उसके बिना ,
पर आज भी उसके संग चले रास्तों से  ही ये दिल जुड़ा  सा है ,

अब तो जी करता है कि  मैं फिर उन  रास्तों पे लौट चलूँ ,
 उन्ही पुराने रास्तों पे खुद को फिर ढूंढ लूं ,
पर वक़्त की रफ़्तार ने कुछ इस तरह बाँध दिया है मुझे कि ,
अब तो मुझमे ही सब कुछ रूका सा है ...






3 comments:

  1. kya baat kya baat kya baat... Amazing, wonderful... New talent sir.

    ReplyDelete
  2. dukh ka aapar sagar....:P
    laut ke ni ja sakta toh aane wale raste un jaise bana le... free advise hai leni hai toh lo warna....;)

    ReplyDelete
  3. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete