Monday, December 31, 2012

Akelapan

ये कैसी पहेली है तू, जो मुझे ना समझ आता  है ,
कभी तो रास आये ,तो कभी बड़ा बुझाता है ,
 अक्सर एक सवाल बन के सामने खड़ा हो,
तू मुझमे छिपे एक और चेहरे की खोज कराता  है .

लोगों से सुना है मैंने कि तू तो दुःख का साथी है
पर मैं तो खुशियों मे भी तुझे आस-पास ही पाता हूँ ,
सच बोलूं तो मेरी एक आदत बन गया है तू,
अब तो तेरे साथ मे ही  मुझे कुछ चैन आता है ,

जब भी सोचता हूँ तुझसे हुई पहली मुलाक़ात के बारे मे ,
तो  मुझे तो गुमनामी के वो बीतें लम्हें ही याद आते है ,
मैं बेचारा तो समय से हार ही बैठा था उस वक़्त ,
तब तेरे दिए वो सहारे मुझे आज भी तेरा एहसानमंद बना जाते हैं

 माना कि अब ज़िन्दगी थोड़ी भीड़ भरी हो गयी हैं ,
पर इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं अपने पुराने साथी को ऐसे ही छोड़ दूं ,
 तेरे चंद लम्हों का साथ आज भी इतनी  शिद्दत से जीता हूँ मै कि ,
तेरे वजूद की बातों को दरकिनार कर , तेरे संग फिर से आगे बढ़ने का दिल कर जाता है ..





2 comments:

  1. nice on...:)
    par sad feeling hai...
    so be happy..........:)

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  2. very nice lines.. and its true also.. only one suggestion , be happy always.. kabhi kabhi akelapan hme bahut kuch shikhata h. so sometimes its gud for us .

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