Tuesday, August 24, 2010

Zindagi

जब-२ लगे कि बहुत पाठ पढ़ लिए हैं मैंने.
तब-२ तू मुझे एक  नया पाठ पढ़ाती है,
जब-2 मुझे लगे कि बहुत दुनिया देखी ली है मैंने.
तब-२  एक नयी दुनिया दिखा के , तू मुझे दुबारा हैरत मे लाती है.
यूँ तो मेरा सोचा हुआ अक्सर मुझे नसीब नहीं होता,
दिल का बुना हुआ मेरा ख्वाब अक्सर पूरा नहीं होता,
और जब मैं तुझसे हार के ख्वाब बुनना छोड़ दूं.
ठीक उसी पल तू मुझे एक नया ख्वाब दिखाती है , 
और जब मैं  इसे तेरा एक झूठा दिलासा समझ के इससे दूर जाना चाहूँ,
तब आशाओं की सुनहरी सेज दिखा कर तू मुझमे सपनों के पूरा होने की नयी उम्मीद जगाती है,
मैंने अपने सपनो के पूरा करने के लिए पूरा दम लगाया है,
औरों की क्या बात करूँ, मैंने तो तुझपे भी दांव लगाया है,.
इन सबके बाद भी अगर कभी मेरा ख्वाब पूरा ना हो,तब तू  मुझे बहुत सताती है,
मेरी हार मे मेरी गलतियाँ दिखा कर, तू मुझे खुद पर हसांती है,
सुख-दुःख तो जीवन के दो पहलू है, ये तो चलते रहेंगे,
मेरे ख्वाब कभी आकाश तो कभी धरा पर  रहेंगे,
पर इन सबमे तेरी मुझसे ये आँख मिंचोली, मुझे बहुत भाती है,
दुःख के समय मे भी तुझसे जीतने की चाह,मुझमे हमेशा एक नया हौसला जगाती है,
और जब-२ लगे कि बहुत पाठ पढ़ लिए हैं मैंने.
तब-२ तू मुझे एक  नया पाठ पढ़ाती है,
जब-2 मुझे लगे कि बहुत दुनिया देखी ली है मैंने.
तब-२  एक नयी दुनिया दिखा के , तू मुझे दुबारा हैरत मे लाती है...

2 comments:

  1. choti se zindgi kahte hai zindge ko
    use mai aagaz usse mai makam
    muskilo mai ghirna ubarna ussi mai
    usse mai hai navras ke sare pegam........

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  2. hindi main to ab samjh bhi nahi aati poems,,, bt look like you are learning a lot frm jindgi,, nice one man... cheer up.......

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